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जीवनी: पंडित जवाहरलाल नेहरू का जीवन परिचय (निबंध)

Pandit Jawaharlal Nehru in Hindi

असफलता तभी आती है जब हम अपने आदर्श, उद्देश्य, और सिद्धांत भूल जाते हैं। -Quotes By Jawaharlal Nehru in Hindi

सभी पाठकों को नमस्कार! आज के इस लेख में हम स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के बारे में अर्थात जवाहरलाल नेहरू का जीवन परिचय आपके साथ शेयर कर रहे हैं।

15 अगस्त 1947 को ब्रिटिश शासन से मुक्ति पाने के बाद पंडित जवाहरलाल नेहरू को देश का प्रथम प्रधानमंत्री चुने गए। उन्हें भारतीय राजनीति का मुख्य केंद्र बिंदु भी माना जाता है।

देश की आजादी के संघर्ष में शामिल अनेक स्वतंत्रता सेनानियों में से एक जवाहरलाल नेहरु स्वतंत्रता अभियान के उन लोकप्रिय नेताओं में से एक थे। जिन्होंने आजादी के उपरांत भी वर्ष 1964 तक प्रधानमंत्री के रूप में देश की सेवा की।

इस लेख में हम श्री जवाहरलाल नेहरू की शिक्षा, पंडित जवाहरलाल नेहरू हिस्ट्री से लेकर उनके राजनीतिक सफर की चर्चा करेंगे तथा देश की आजादी में उनके अमूल्य योगदान को भी समझेंगे।

हमें आशा है जवाहरलाल नेहरु की जीवनी पर निबंध पर आधारित यह लेख आपको पसंद आएगा तो आइए लेख की शुरुआत करते हैं।

Biography of Pandit Jawaharlal Nehru in Hindi

शीर्षकजवाहरलाल नेहरू जीवन परिचय
नामपंडित जवाहरलाल नेहरू
जन्म14 नवंबर 1889
जन्मस्थानइलाहाबाद, उत्तर-पश्चिमी प्रान्त, ब्रिटिश भारत
मृत्यु27 मई 1964
उम्र74 वर्ष
मृत्युस्थाननई दिल्ली, भारत
पिताश्री मोतीलाल नेहरू
माताश्रीमती स्वरूपरानी नेहरू
पत्नीकमला कौल जी
बच्चेइन्दिरा गांधी
शिक्षाहैरो स्कूल, लंदन; ट्रिनिटी कॉलेज, कैम्ब्रिज; इन्स ऑफ कोर्ट स्कूल ऑफ लॉ, लंदन
व्यवसायबैरिस्टर, लेखक और राजनीतिज्ञ
राजनीतिक दलभारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
पदभारत के प्रथम प्रधानमंत्री
पद बहाल15 अगस्त 1947 – 27 मई 1964
पुरस्कारभारत रत्न से सम्मानित
प्रकाशन / कार्यभारत की खोज, विश्व इतिहास की झलक, जवाहरलाल नेहरू की आत्मकथा, एक पिता से उनकी बेटी को पत्र, आदि
मौत का कारणहार्ट अटैक

पंडित जवाहरलाल नेहरू पर हिंदी में निबंध

पंडित समुदाय में जन्म लेने की वजह से उन्हें पंडित नेहरू एवं बच्चों के प्रिय उन्हें चाचा नेहरू बुलाते थे।

कांग्रेस पार्टी के जुझारू नेता के रूप में पंडित जवाहरलाल नेहरू ने देश की आजादी में लंबे समय तक सक्रिय रहकर कार्य किया। उन्होंने आजादी के उपरांत भी प्रधानमंत्री के तौर पर देश की बागडोर संभाली।

बता दें पंडित नेहरू अपने पिता मोतीलाल नेहरू के बड़े पुत्र थे। वे एक बेहद नामी वकील थे। लंदन के उच्च विश्वविद्यालयों में नेहरू को पढ़ाई करने का मौका मिला था लेकिन बतौर वकील अपनी सेवाएं देने से बेहतर उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेना समझा। आजादी के संघर्ष में नेहरू जी स्वतंत्रता आंदोलनों में 9 बार जेल भी गए।

Pandit Jawaharlal Nehru Biography in Hindi

4 नवंबर 1889 को जन्मे पंडित जवाहरलाल नेहरू का जन्म इलाहाबाद में हुआ था। संपन्न परिवार में जन्मे नेहरू के पिता मोतीलाल नेहरू एक बैरिस्टर थे जिन्हें स्वतंत्रता संग्राम के दौरान दो बार कांग्रेस पार्टी का अध्यक्ष चुना गया।

जवाहरलाल नेहरू की माता स्वरूपरानी एक कश्मीरी पंडित थी। जवाहरलाल नेहरू उनके पिता के सबसे बड़े पुत्र थे उनकी दो बहने थी जिनका नाम विजयलक्ष्मी एवं कृष्णा हठीसिंह था।

नेहरू जब मात्र 14 वर्ष के थे उन्होंने निजी ट्यूटर (अनुशिक्षक) के माध्यम से घर पर ही प्रारंभिक शिक्षा पूर्ण की तथा 15 वर्ष की उम्र में उन्हें शिक्षा के लिए उनके पिता ने भेजने का फैसला लिया। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा लंदन के हैरो नामक स्कूल से की और आगे की पढ़ाई अर्थात कॉलेज कि पढ़ाई लंदन के कैंब्रिज विश्वविद्यालय से की।

पढ़ाई पूरी करने के दौरान जीवन के लगभग 7 वर्ष इंग्लैंड में उन्होंने बिताए! परंतु वहां रहने के दौरान उन्हें महसूस हुआ कि वे ना तो असल में इंग्लैंड के है और ना ही भारत में।

बता दे नेहरू एक उत्कृष्ट लेखक भी थे तथा इंग्लैंड में रहते हुए इस दौरान उन्होंने अपने दिल की बात रखते हुए “मैं पूर्व और पश्चिम का एक कतार मिश्रण बन गया हूं, हर जगह घर से बाहर, अब जहां पर” की रचना की।

वर्ष 1912 में नेहरू भारत लौटे तथा 1916 में उनकी शादी कमला नेहरू से हुई और फिर वे दिल्ली में ही बस गए।

वर्ष 1917 में उन्हें एक पुत्री हुई जिसका नाम इंदिरा रखा गया जो बाद में अपने पिता से ही प्रेरित होकर भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री बनी। जवाहरलाल नेहरू 1919 में पहली बार महात्मा गांधी के संपर्क में आए और वहीं से देश के प्रति कुछ करने की इच्छा जाग उठी।

भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने वाले नेहरू 1930 से लेकर 1940 तक एक प्रिंसिपल लीडर माने जाते थे। कांग्रेस पार्टी से लेकर स्वतंत्र सेनानी उनकी बातें फॉलो करते थे।

Pandit Jawaharlal Nehru Essay in Hindi 10 Lines

आइए जवाहरलाल नेहरू के राजनीतिक जीवन पर नजर डालते हैं!

  • वर्ष 1912 को पहली बार एक प्रतिनिधि के रूप में उन्होंने बांकीपुर कांग्रेस में भाग लिया।
  • वे 1916 में पहली बार राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के संपर्क में आए और यहीं से गांधी जी के जीवन को नेहरू जी को काफी प्रभावित किया तथा गांधी जी प्रेरणा के स्रोत बन गए।
  • वर्ष 1919 में जवाहरलाल में नेहरू होम रूल लीग इलाहाबाद के सचिव बन गए।
  • वर्ष 1920 में पहली बार उन्होंने उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में किसान मार्च ऑर्गेनाइजर किया।
  • भारत के इतिहास के लोकप्रिय आंदोलन में से एक असहयोग आंदोलन में भाग लेने वाले नेहरू को दो बार इस आंदोलन की वजह से जेल जाना पड़ा।
  • उसके बाद अगले ही वर्ष 1923 में नेहरू को अखिल भारतीय कांग्रेस समिति का अध्यक्ष बनाया गया।
  • वर्ष 1926 में उन्होंने कई विदेश यात्रा संपन्न की वे इटली, बेल्जियम, स्विट्जरलैंड, जर्मनी रूस जैसे देशों में गए।
  • वर्ष 1928 में साइमन कमीशन के दौरान उन पर लाठीचार्ज किया गया।

10 Sentences About Jawaharlal Nehru in Hindi

  1. वर्ष 1928 में ही उन्होंने ऑल पार्टी कांग्रेस में भी शिरकत की। इसी वर्ष उन्होंने इंडिपेंडेंस फॉर इंडिया लीग की स्थापना की तथा इसकी जनरल सेक्रेटरी बनाई गई।
  2. वर्ष 1929 में जवाहर लाल नेहरू को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के लाहौर अधिवेशन का अध्यक्ष पद मिला। लाहौर में हुए इस सेशन का सिर्फ एक ही लक्ष्य था देश को ब्रिटिश शासन से मुक्ति देना।
  3. वर्ष 1930 से 1935 तक भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के लिए बड़ा साल रहा। इस दौरान देश की आजादी के लिए कांग्रेस के नेताओं एवं स्वतंत्रता सेनानियों ने विभिन्न आंदोलनों में भाग लिया। तथा कई नेताओं समेत जवाहरलाल नेहरू को इस दौरान जेल भी जाना पड़ा।
  4. वर्ष 1935 में ही जवाहरलाल नेहरू ने अल्मोड़ा जेल में रहते हुए आत्मकथा बायोग्राफी पुणे की! नेहरू द्वारा लिखी गई इस किताब को Toward Freedom भी कहा जाता है। 1936 में जवाहरलाल नेहरू बायोग्राफी को पहली बार लांच किया गया।
  5. जेल से छूटने के बाद नेहरू अपनी बीमार पत्नी को देखने के लिए स्विजरलैंड रवाना हुए।
  6. एक बार फिर से अक्टूबर 1940 को व्यक्तिगत सत्याग्रह पेश करने की वजह से नेहरू को जेल में डाल दिया गया। जिसका उद्देश्य था युद्ध में भारत की जबरन भागीदारी करवाना। तथा अगले ही वर्ष उन्हें जेल से छोड़ दिया गया।
  7. वर्ष 1942 में मुंबई में हुए ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी सत्र में नेहरू ने भारत छोड़ो प्रस्ताव पारित किया।
  8. उसी वर्ष नेहरू समेत अन्य लीडर्स को गिरफ्तार कर लिया गया तथा उन्हें अहमदनगर जिला में ले जाया गया। नेहरू के पूरे जीवन में यह सबसे लंबी और आखिरी हिरासत मानी जाती है।
  9. लगभग 3 साल बाद जनवरी 1945 में उन्हें रिहा किया गया।
  10. वर्ष 1946 में जवाहर लाल नेहरू को चौथी बार कांग्रेस पार्टी के प्रेसिडेंट के रूप में जिम्मेदारी दी गई हालांकि उसके बाद भी वह इस पद पर बने रहे।

जवाहरलाल नेहरू के राजनीतिक जीवन का अध्ययन करने के बाद आप स्वतंत्र भारत के लिए नेहरू के अमूल्य योगदान का अंदाजा लगा सकते हैं।

आजादी के उपरांत वे देश के पहले प्रधानमंत्री थे जिन्होंने राष्ट्रीय ध्वज फहराया और “Tatha Lal Kila se Tryst with Destiny” नामक भाषण देकर पूरी दुनिया में राष्ट्र को सम्मानित किया।

प्रधानमंत्री बनने के पश्चात भारत देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद ने उन्हें भारत रत्न अवार्ड से सम्मानित करने की पेशकश की। बता दें नेहरू जी से पूर्व यह अवार्ड पहले भी दो अन्य हस्तियों को मिल चुका था।

पंडित जवाहरलाल नेहरू पर निबंध, योगदान और आजादी के पश्चात नेहरू का कार्यकाल

पंडित जवाहरलाल नेहरू को आधुनिक भारत का निर्माता भी कहा जाता है क्योंकि द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद आर्थिक रूप से कमजोर एवं विभाजित भारत का पुनर्निर्माण करना कोई सरल कार्य नहीं था। लेकिन आजादी के बाद प्रथम प्रधानमंत्री बनने के बाद से ही पंडित जवाहरलाल नेहरू ने जो प्रथम पंचवर्षीय योजना लागू कि वह भारत के दूरगामी विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण थी।

इस पंचवर्षीय योजना के बाद में कई अच्छे नतीजे देखने को मिले इसलिए भारत में पंचवर्षीय योजना को बाद में भी जारी रखा गया। भारत के पुनर्निर्माण में नेहरू जी द्वारा किए गए कार्यों एवं उनकी विचारधारा को आइए निम्नलिखित बिंदु में समझते हैं।

Pandit Jawaharlal Nehru History in Hindi

»»आजादी के वक्त देश की अर्थव्यवस्था चरमरा गई थी देश के घरेलू उद्योगों को काफी नुकसान पहुंचा था तथा देश में औद्योगीकरण की नीति का पालन किया।

»»उन्होंने लोगों के बीच फैली रूढ़िवादी विचारधारा को समाप्त कर आधुनिक मूल्यों और विचारों को संस्कारित किया।

»»समान धर्म की नीति अपनाते हुए धर्मनिरपेक्ष और उदारवादी दृष्टिकोण अपनाया।

»»उन्होंने भारत की मूल एकता पर ध्यान केंद्रित किया।

»»इसके अलावा, विभिन्न सामाजिक सुधारों जैसे कि सार्वजनिक शिक्षा, भारतीय बच्चों के लिए मुफ्त भोजन, महिलाओं के लिए कानूनी अधिकार, जिनमें संपत्ति के वारिस होने की क्षमता शामिल है।

»»पति को तलाक देने तथा जाति प्रथा एवम् धार्मिक भेदभाव पर रोक लगाने के लिए कानून लागू लिए।

पंडित जवाहरलाल नेहरू की मृत्यु कैसे हुई और कब हुई?

दरअसल यदि आप इंटरनेट पर पंडित जवाहरलाल नेहरू जी की मौत की वजह सर्च करें तो आपके सामने कई बातें निकलकर आएंगी। लेकिन दरअसल उनकी मौत की वजह लगातार उनकी तबीयत में कमी थी।

वर्ष 1962 के पश्चात लगातार नेहरू जी की तबीयत में गिरावट देखी जा रही थी। दरअसल इसके पीछे जो मुख्य वजह थी 1962 में हुआ भारत-चीन युद्ध जिसका नेहरू ने घोर विरोध किया और वे चीन द्वारा की गई इस हरकत को एक विश्वासघात मानते थे।

उस समय नेहरू प्रधानमंत्री पद का कार्यकाल संभाल रहे थे और इस घटना ने उन्हें अंदर तक झकझोर कर दिया। इस दौरान तबीयत में सुधार के लिए वह वर्ष 1963 में कश्मीर भी गए तथा कुछ दिन देहरादून में भी उन्होंने बिताए।

परंतु देहरादून से दिल्ली लौटने के बाद 1964 में 27 मई का दिन जब नेहरू प्रातः 6:30 बजे उठे तो तबीयत में गड़बड़ की वजह से अचानक नेहरू बेहोश हो गए और बेहोशी की हालत में ही उन्होंने अपने प्राण त्याग दिए डॉक्टर बताते हैं कि हार्ट अटैक की वजह से उनकी मौत हो गई।

इस घटना से पूरी दुनिया के अखबारों में खलबली मचा दी ऐसा कोई भी अखबार न था जिसमें जवाहरलाल नेहरू के निधन की खबर ना छपी हो।

जवाहरलाल नेहरू द्वारा लिखित प्रमुख किताबें

तो साथियों पंडित जवाहरलाल नेहरू का जीवन परिचय यहीं समाप्त करते है। मुझे आशा है Jawaharlal Nehru in Hindi Biography में आपको नेहरू जी के जीवन से जुड़े कई उपयोगी जानकारियां जानने को मिली होगी।

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